वुं मा बोली दे
गणेश खुगसाल ‘गणी’ गढ़वाली भाषा के लोकप्रिय और सशक्त कवि हैं। ‘वुं मा बोली दे’ उनकी प्रकाशित पहली काव्यकृति है। शीर्षक…
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फिल्म-संगीत

नई सुबह की आस बंधाती है ‘सुबेरौ घाम’
फिल्म समीक्षा ‘महिला की पीठ पर टिका है पहाड़’ यह सच, हालिया रिलीज गढ़वाली फीचर फिल्म ‘सुबेरौ घाम’ की ‘गौरा’…
Read More » ये जो निजाम है
ये जो निजाम है तुझको माफ़ कर देगाखुद सोच क्या तू खुद को माफ़ कर देगा बारिशों में भीग रहा…
Read More »मैं हंसी नहीं बेचता
जी हांमैं हंसी नहीं बेचतान हंसा पाता हूं किसी कोक्योंकि मुझे कई बारहंसने की बजाए रोना आता है हंसने हंसाने…
Read More »गैरा बिटि सैंणा मा
उत्तराखण्ड की जनसंख्या के अनुपात में गैरसैंण राजधानी के पक्षधरों की तादाद को वोट के नजरिये से देखें तो संतुष्ट…
Read More »लंपट युग में आप और हम
बड़ा मुश्किल होता है खुद को समझाना, साझा होना और साथ चलना। इसीलिए कि ‘युग’ जो कि हमारे ‘चेहरे’…
Read More »वह आ रहा है अभी..
कुछ लोग कह रहे हैंतुम मत आओवह आ रहा है अभी उसके आने से पहलेतुम आओगे, तोकुछ नहीं बदलेगा यहां-वहांन…
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