मध्य हिमालयी कुमाउनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलानाम्त्क अध्ययन
(इस लेखमाला का उद्देश्य मध्य हिमालयी कुमाउनी, गढ़वाळी एवम नेपाली भाषाओँ के व्याकरण का शास्त्रीय पद्धति कृत अध्ययन नही है…
Read More »छन्नी, छन्ना अर मट्यंळ
अच्काल श्याम ह्व़े ना अर दरेक/प्रत्येक टी.वी. चैनेलुं मा दिन भर की खबरूं छांच छुल़े जांद.क्वी चैनेल नाम दींदु हाई…
Read More »उफ ! ये बेशर्मी
प्रदेश का लोकायुक्त कानून भाजपा के मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूडी के गले की फाँस बनता जा रहा है। लोकायुक्त विधेयक…
Read More »तबादला उद्योग !
तबादला उद्योग उद्योग बि उनि उद्योग च जन हौर कंसल्टिंग उद्योग होंदन. जी! हाँ पैल दलाल/बिचौलिया जौंकू बोल्दा छा ऊन…
Read More »लोकसभा मा क्य काम-काज हूंद भै ?
(Garhwali Satire, Garhwal Humorous essays, Satire in Uttarakahndi Languages, Himalayan Languages Satire and Humour ) अच्काल पार्लियामेंट मा रोज इथगा…
Read More »क्य मि बुढे गयों ?
फिर बि मै इन लगद मि बुढे गयों! ना ना मि अबि बि दु दु सीढ़ी फळआंग लगैक चढदु. कुद्दी…
Read More »गढवाली में गढवाली भाषा सम्बन्धी साहित्य
गढवाली में गढ़वाली भाषा, साहित्य सम्बन्धी लेख भी प्रचुर मात्र में मिलते हैं. इस विषय में कुछ मुख्य लेख इस…
Read More »भाषा संबंधी ऐतिहासिक वाद-विवाद के सार्थक सम्वाद
गढवाली भाषा में भाषा सम्बन्धी वाद-विवाद गढवाली भाषा हेतु विटामिन का काम करने वाले हैं. जब भीष्म कुकरेती के ‘गढ़…
Read More »मानकीकरण पर आलोचनात्मक लेख
मानकीकरण गढवाली भाषा हेतु एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और मानकीकरण पर बहस होना लाजमी है. मानकीकरण के अतिरिक्त गढवाली में…
Read More »वीरेन्द्र पंवार की गढवाली भाषा में समीक्षाएं
वीरेन्द्र पंवार गढवाली समालोचना का महान स्तम्भ है. पंवार के बिना गढवाली समालोचना के बारे में सोचा ही नहीं जा…
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