इ ब्यठुला – इ जनना (गढ़वाली)
गीत (अनुवादित) / पयाश पोखड़ा // ************************* इ ब्यठुला इ जनना कै भि चीजि की खत-पत खत्ता फोळ नि करदा…
Read More »गढ़वाली भाषा के हित के लिए व्यापक दृष्टि सर्वोपरी
नरेन्द्र कठैत // अक्सर सुनने में आता है कि हम हिंदी भाषा के आचार व्यवहार में तालव्य ‘श’ का उच्चारण…
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हिन्दी-कविता

तय करो किस ओर हो तुम
बल्ली सिंह चीमा // तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।आदमी के पक्ष में हो…
Read More » तमsलि़ उंद गंगा: सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेज़
आशीष सुंदरियाल // आज के समय में जब हमें ‘अबेर’ नहीं होती बल्कि हम ‘late’ हो रहे होते हैं, हम…
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आलेख

मजबूत इच्छाशक्ति से मिला ‘महेशानन्द को मुकाम
‘गांव में डड्वार मांगने गई मेरी मां जब घर वापस आई तो उसकी आखें आसूओं से ड़बडबाई हुई और हाथ…
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संस्कृति

पहाड़ के लोकजीवन में रची बसी रोपणी
संजय चौहान // पहाड़ के लोकजीवन मे अषाड़ महीने का सदियों से गहरा नाता रहा…
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हिन्दी-कविता

देवदार
अनिल कार्की // मेरे पासअन्नत की यात्राएं नहींन ही यात्राओं केदस्तावेज मैं देवदार हूँमनिप्लाँट होनामेरे बस में नहीं इतिहास परमेरा…
Read More » गढ़वाळि भाषा मानकीकरण पर तीन दिनै कार्यशाला
रमाकान्त बेंजवाल // दून यूनिवर्सिटी, देहरादून मा तीन दिनै (20 जून बिटि 22 जून, 2019 तलक) गढ़वाळि भाषा औच्चारणिक फरक…
Read More »गढ़वाळि भाषा और साहित्य की विकास यात्रा
पुस्तक समीक्षा / समीक्षक- डॉ. अचलानन्द जखमोला // अप्रितम अभिव्यंजना शक्ति, प्रभावोत्पादकता, संप्रेषणीयता, गूढ़ अर्थवता तथा अनेकार्थता को व्यक्त करने…
Read More »शिकैत
धनेश कोठारी// जिंदगी! तू हमेसा समझाणी रै मि बिंगणु बि रौं/ पर माणि कबि नि छौं जिंदगी! तिन सदानि दिखै…
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