काफल पाको ! मिन नि चाखो
‘काफल‘ एक लोककथा उत्तराखंड के एक गांव में एक विधवा औरत और उसकी 6-7 साल की बेटी रहते थे। गरीबी में किसी तरह दोनों…
Read More »सामयिक गीतों से दिलों में बसे ‘नेगी’
अप्रतिम लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के उत्तराखंड से लेकर देश दुनिया में चमकने के कई कारक माने जाते हैं.…
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फिल्म-संगीत

सिल्वर स्क्रीन पर उभरीं अवैध खनन की परतें
फिल्म समीक्षा- गढ़वाली फीचर फिल्म उत्तराखंड में ‘अवैध खनन’ सिर्फ राजनीतिक मुद्दा भर नहीं है। बल्कि, यह पहाड़ों, नदियों, गाड-गदेरों…
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आलेख

दुनियावी नजरों से दूर, वह ‘चिपको’ का ‘सारथी’
दुनिया को पेड़ों की सुरक्षा के लिए ‘चिपको’ का अनोखा मंत्र देने और पर्यावरण की अलख जगाने वाले ‘चिपको आंदोलन’…
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फिल्म-संगीत

‘जग्वाळ’ से शुरू हुआ था सफर
उत्तराखंडी फिल्मों का सफरनामा 4 मई का दिन उत्तराखंड के लिए एक खास दिन है। जब दुनिया में सिनेमा के…
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संस्कृति

पुष्कर की ‘मशकबीन’ पर ‘लोक’ की धुन
चेहरे पर हल्की सफ़ेद दाढ़ी… पहाड़ी व्य क्तित्व और शान को चरितार्थ करती हुई सुंदर सी मूछें… सिर पर गौरवान्वित…
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गेस्ट-कॉर्नर

मैं माधो सिंह का मलेथा हूँ
हुजूर!! मैं मलेथा हूं, गढ़वाल के 52 गढ़ों के वीरों की वीरता के इतिहास की जीती जागती मिसाल। मैंने इतिहास…
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संस्कृति

देवतुल्य हैं ढोल दमौऊं
पहाड़ी लोकवाद्य ढोल दमौऊं को देवतुल्य माना गया है। दुनिया का यही एकमात्र वाद्य है जिसमें देवताओं को भी अवतरित…
Read More » किसे है सभ्य बने रहने की जरुरत
जमाने के साथ बदलते पहाड़ी संगीत के बहाने कई बार बहसें शुरू हुई। उनके अब तक भले ही पूरी तरह…
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गेस्ट-कॉर्नर

नई ऊर्जा, नई दिशा और नया आकाश
तुंगनाथ मंदिर में नौबत बजाने वाले लोक कलाकार मोलूदास के अंतिम क्षणों में हमें जो बात सबसे अधिक आहत कर…
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