वह दूसरे जन्म में पानी को तरसती रही
एक परिवार में दो महिलाएं जेठानी और देवरानी रहती थी। जेठानी बहुत दुष्ट और देवरानी शिष्ट, सौम्य, ईमानदार व सेवा…
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संस्कृति

फिर जीवंत हुई ‘सयेल’ की परंपरा
हरियाली पर्व ‘हरेला’ की तरह पहाड़ के लोकजीवन में धान की रोपाई के दौरान निभाई जाने वाली ‘सयेल’ की परंपरा…
Read More » “सुबेर नि हूंदि“ (गज़ल)
काम काज़ा की अब कैथै देर नि हूंदि अजकाल म्यारा गौं मा सुबेर नि हूंदि घाम त तुमरि देळमि कुरबुरि…
Read More »गुलज़ार साहब की कविता “गढ़वाली” में
लोग सै ब्वळदिन, ब्यठुला हैंकि बानि का उलखणि सि हुंदिन । सर्या राति फस्सोरिक नि सिंदिन, कभि घुर्यट त कबरि…
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गेस्ट-कॉर्नर

समझौता-विहीन संघर्षों की क्रांतिकारी विरासत को सलाम
तेइस अप्रैल, 1930 को बिना गोली चले, बिना बम फटे पेशावर में इतना बड़ा धमाका हो गया कि एकाएक अंग्रेज…
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गेस्ट-कॉर्नर

दुनिया ने जिन्हें माना पहाड़ों का गांधी
24 दिसंबर 1925 को अखोड़ी गाँव,पट्टी-ग्यारह गांव, घनसाली, टिहरी गढ़वाल में श्रीमती कल्दी देवी और श्री सुरेशानंद जी के घर…
Read More » गोर ह्वेग्यो हम
जैकि मरजि जनै आणी, वु उनै लठ्याणूं छ जैकि गौं जनै आणी, वु उनै हकाणू छ ज्वी जनै पैटाणू छ,…
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आलेख

युगों से याद हैं सुमाड़ी के ‘पंथ्या दादा’
’जुग जुग तक रालू याद सुमाड़ी कू पंथ्या दादा’ लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के एक गीत की यह पंक्तियां आपको…
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हिन्दी-कविता

हत्यारी सड़क
अतुल सती// ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ तक लेटी है नाग की तरह जबडा फैलाये हत्यारी सडक राममार्ग 58 रोज माँगती है भूखी नर भक्षणी शिकार अब तक…
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