गेस्ट-कॉर्नर

हिमालयन फोकलोर के संग्रहकर्ता पं. तारादत्त गैरोला

नई पीढ़ी शायद ही इस नाम की जानकारी रखती हो। ये पंडित तारादत्त गैरोला जी हैं। इनका जन्म सन 1855 में टिहरी गढ़वाल जिले के ढालढुंग गांव, बडियारगढ़ में हुआ था। संभवतः अंग्रेजी साहित्य में टिहरी के पहले एम.ए. रहे होंगे। वकालत की पढ़ाई की और प्रसिद्ध वकील भी रहे। एक अंग्रेज अधिकारी ईएस ओकले के साथ खासकर गढ़वाली भाषा की लोक गाथाओं का संकलन किया जो “हिमालयन फोकलर” नाम से प्रकाशित भी हुआ।

इन्होंने लोक गाथाओं पर आधारित कुछ चर्चित गीत भी लिखे, जिनमें सदेई और फ्यूंली रौतेली खास हैं। सन 1932 के आसपास संभवतः जब गढ़वाली कविताओं का पहला संग्रह प्रकाशित हुआ तब उसकी भूमिका गैरोला जी ने ही लिखी थी। उस संग्रह में इनकी भी दो कविताएं शामिल थी। प्रकाशन विश्वंभर दत्त चंदोला जी ने किया था। सन 1940 में इनका देहांत हुआ।

– लोकेश नवानी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button