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फिल्म-संगीत

‘रिवर्स माइग्रेशन’ के किस्से पर हावी ‘लव ट्राएंगल’
उत्तराखंड में हाल के वर्षों में ‘पलायन’ के समाधान की उम्मीद के तौर पर ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की कहानियां अखबारों की…
Read More » सिंह ग्रन्थावली’: भजनसिंह ‘सिंह’ के कृत्तित्व का साक्षात्कार
‘सिंह ग्रन्थावली’ नाम से गढ़वाली भाषा साहित्य का महत्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है। गढ़वाली साहित्य के युगपुरुष भजन सिंह ‘सिंह’…
Read More »अपण ब्वे का मैस
अपण ब्वे का मैस/ होला वो/ जो हमरि जिकुड़ि मा घैंटणा रैन/ घैंटणा छन कीला/वाडा/दांदा! जो, हमारा नौ फर, कागज…
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आजकल

गैरसैंण से ऐसी ‘दिल्लगी’ ठीक नहीं
जब नेता ‘बहरूपिये’, अफसर ‘मौकापरस्त’ और जनता ‘मूर्ख’ हो जाए तो राजधानी के सवाल का स्थायी हल मिलना मुश्किल ही…
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गेस्ट-कॉर्नर

भांग की खेती के हैं कई फायदे
उत्तराखंड की पूर्ववर्ती सरकार ने कारोबारी तौर पर भांग की खेती के लिए कदम उठाए ही थे, कि भद्रजनों और…
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हिन्दी-कविता

जादूगर खेल दिखाता है
जादूगर खेल दिखाता हैअपने कोट की जेब सेनिकालता है एक सूर्ख फूलऔर बदल देता है उसे पलकझपकते ही नुकीले चाकू…
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आलेख

‘लोक’ की भाषा और संस्कृति को समर्पित किरदार
ब्यालि उरडी आई फ्योंलीसब झैड़गेन/किनगोड़ा,छन आज भी हंसणा…।बर्सु बाद मी घौर गौं,अर मेरि सेयिं कुड़ि बिजीगे…।जंदरि सि रिटणि रैंद,नाज जन…
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आजकल

17 साल बाद भी क्यों ‘गैर’ है ‘गैरसैंण’
गैरसैंण एकबार फिर से सुर्खियों में है। उसे स्थायी राजधानी का ओहदा मिल रहा है? जी नहीं! अभी इसकी दूर…
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यात्रा-पर्यटन

उत्तराखंड में एक और फूलों की घाटी ‘चिनाप’
विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से तो हर कोई परिचित है। लेकिन इससे इतर एक और फूलों की जन्नत है…
Read More » शिकायतें तब भी थीं, अब भी हैं
उत्तराखंड अलग राज्य बनने से पहले यूपी सरकार को लेकर जितनी शिकायतें ‘पर्वतजन’ के मानस पर अंकित थीं, उससे कहीं…
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