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गढ़वाली-कविता

मेरि पुंगड़्यों (गढ़वाली कविता)
मेरि पुंगड़्योंहौरि धणि अब किछु नि होंदपण, नेता खुब उपजदन् मेरि पुंगड़्योंबीज बिज्वाड़खाद पाणिलवर्ति-मंड्वर्तिकिछु नि चैंदस्यू नाज पाणिडाळा बुटळाखौड़ कत्यार…
Read More » 1951 से 1975 तक
सारे भारत में स्वतंत्रता उपरान्त जो बदलाव आये वही परिवर्तन गढ़वाल व गढ़वाली प्रवासियों में भी आये, स्वतंत्रता का सुख,…
Read More »इतिहास में एक मील का पत्थर
प्रिय मित्रों आप को खुशी होगी कि चिट्ठी पत्री का एक प्रसिद्ध विशेष कविता विशेषांक प्रकाशित होने की इन्तजार में…
Read More »1925 से 1950 का काल
सामाजिक स्थिति तो वही रही किन्तु स्थितियों में गुणकारक वृद्धि हुई। याने की शिक्षा वृद्धि, उच्च शिक्षा के प्रति प्रबल…
Read More »1850 ई. से 1925 ई. तक
गढवाली में आधुनिक कविताएँ लिखने का आरम्भ ब्रिटिशकाल में ही शुरू हुआ। हाँ 1875 ई. के बाद प. हरिकृष्ण रुडोला,…
Read More »पूर्व – आधुनिक काल
गढवाली साहित्य का आधुनिक काल 1850 ई. से शुरू होता है। किन्तु आधुनिक रूप में कविताएँ पूर्व में भी रची…
Read More »आधुनिक कविता का इतिहास
यद्यपि गढवाली कविता कि समालोचना एवं कवियों कि जीवनवृति लिखने कि शुरुआत पंडित तारादत्त गैरोला ने 1937 ई. से की…
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यात्रा-पर्यटन

परम्पराओं में निहित लोक कल्याण
श्री बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने और बंद किये जाने की मान्य परम्पराओं के तहत ज्योतिषीय गणनाओं में लोक कल्याण…
Read More » नाथ संप्रदायी साहित्य का प्रभाव
चूँकि गढवाल में नाथ सम्प्रदाय का प्रादुर्भाव सातवीं सदी से होना शुरू हो गया था और इस साहित्य ने गढ़वाल…
Read More »नाथपंथी साहित्य सन्दर्भ
बगैर नाथपंथी साहित्य सन्दर्भ रहित लेख गढवाली कविता इतिहास नहीं डा. विष्णु दत्त कुकरेती के अनुसार नाथ साहित्य में ढोलसागर,…
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