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विविध

व्यवस्था के विरूद्ध सवाल हूं मैं
जन्मदिवस पर साहित्य प्रेमियों ने स्व. पार्थसारथी डबराल को किया याद ’फन उठाता जो व्यवस्था के विरुद्ध, सवाल हूं मैं/डबराल…
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गढ़वाली-कविता

वेलेन्टाइन (गढ़वाली कविता)
हे वीं तू बि अदान छैं त्वेखुणि बि क्य ब्वन्न हैप्पी वेलेन्टाइन!! Copyright@ Dhanesh Kothari
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विविध

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विविध

रैबार पहाड़ का सब्बि लोखूं तैं..
पहाड़ का सब्बि खास अर आम लोखूं से आग्रह 2011 कि जनगणना शुरू ह्वेगे। ईं जनगणना मा सामाजिक, आर्थिक, आधारूं…
Read More » नगर पालिका ऋषिकेश से मिले सम्मान के प्रतीक
नगरपालिका परिषद ऋषिकेश द्वारा साहित्य के लिए समर्पित स्व. डा. पार्थ सारथि (डबराल) सम्मान 26 जनबरी 2011
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इंटरव्यू

गैरसैंण जनता खुणि चुसणा च
जब बिटेन उत्तराखंड अन्दोलनै पवाण लग अर राज्यौ राजधनी छ्वीं लगी होली त गैरसैंण कु इ नाम गणेंगे। गैरसैंण राजधानी…
Read More »न्युतो
दगड्यों! पैथ्राक दस सालों बटि नामी-गिरामी चिट्ठी-पतरी(गढ़वळी पत्रिका) कि गढ़वळी भाषै बढ़ोत्तरी मा भौत बड़ी मिळवाक च। यीं पतड़ीन् गढ़वळी…
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