गढवाल में मकरैण (मकर संक्रांति) और गेंद का मेला
गंगासलाण याने लंगूर, ढांगु, डबरालस्युं, उदयपुर, अजमेर में मकरसंक्रांति का कुछ अधिक ही महत्व है। सेख या पूस के मासांत…
Read More »क्या नपुंसकों की फ़ौज गढ़वाली साहित्य रच रही है ?
जो जीवविज्ञान की थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं वे जानते हैं कि, जीव-जंतुओं में पुरुष कि भूमिका एकांस ही होती…
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आलेख

टिहरी बादशाहत का आखिरी दिन
टिहरी आज भले ही अपने भूगोल के साथ उन तमाम किस्सों को भी जलमग्न कर समाधिस्थ हो चुकी है। जिनमें…
Read More » संघर्ष की प्रतीक रही टिहरी की कुंजणी पट्टी
देवभूमि उत्तराखंड वीरों को जन्म देने वाली भूमि के नाम पर भी जानी जाती है। इसी राज्य में टिहरी जनपद…
Read More »वरिष्ट साहित्यकार भीष्म कुकरेती का दगड़ वीरेंद्र पंवार कि छ्वीं-बत्थ
वीरेन्द्र पंवार : तुमारा दिखण मा अच्काल गढवाळी साहित्य कि हालात कनि च ?भीष्म : मी माणदो गढवाळी साहित्य कु…
Read More »स्वागत सत्कार (गढ़वाली कविता)
नयि सदी नया बरस तेरु स्वागत तेरु सत्कार हमरा मुल्क कि मोरी मा नारेंण खोळी मा गणेश चौंरौं कि शक्ति…
Read More »चौंठी भुक्कि (गढ़वाली कविता)
छौं मि ये ही मुल्क कु, भुलिग्यों यख कि माया भुलिग्यों वा चौंठी भुक्कि, कोख जैंन मि खिलाया कन नचदा…
Read More »दारु
दारु !पगळीं च बगणि चडांडी कांठ्यों धरु-धरुपीड़ बिसरौण कुमाथमि, द्यब्तौं सि सारु गंगा उंद बगदीदारु उबां-उबां टपदीपैलि अंज्वाळ् अदुड़ि/फेर, पव्वा…
Read More »सौदेर
माया का सौदेर छां हमइन्कलाब जिन्दाबादबैर्यों बग्तौ चेति जावानिथर होण मुर्दाबाद कथगै अंधेरू होलुहम उज्याळु कैद्योंलाभाना कि बिंदुलि मागैणौं तैं…
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